भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 16 का परिचय
कुंती के पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अपना शंख, अनंत-विजय बजाया, और नकुल और सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक बजाया।
आत्मविश्वास या अति-आत्मविश्वास?
"सञ्जय उवाच:"
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ||1.16||
इस श्लोक में पांडवों के अन्य वीरों के शंखनाद का वर्णन किया गया है। धर्मराज युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक शंख बजाया, जिससे यह संकेत मिला कि उनका विजय पथ अनंत और सुनिश्चित है। नकुल ने सुघोष और सहदेव ने मणिपुष्पक शंख बजाया, जो उनकी शक्ति और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
यह शंखनाद केवल युद्ध का आरंभ नहीं था, बल्कि यह दिखाता था कि पांडव अपनी सत्यनिष्ठा और धर्म के बल पर पूरी तरह तैयार हैं। युधिष्ठिर का शंखनाद विशेष रूप से यह इंगित करता है कि सच्चे और धर्मपरायण व्यक्ति की जीत सुनिश्चित होती है, भले ही परिस्थितियाँ कितनी ही कठिन क्यों न हों।
यह श्लोक हमें सिखाता है कि जीवन में जब भी कोई बड़ा संघर्ष हो, तो हमें डरना नहीं चाहिए। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने से अंततः विजय हमारी ही होगी, चाहे कितनी भी चुनौतियाँ आएं।>
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| भगवद् गीता अध्याय 1 श्लोक 16 |
भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी
1. भगवद्गीता के इस श्लोक 1.16 में किसका शंख 'अनन्तविजय' नाम से जाना जाता है?
2. श्लोक के अनुसार, नकुल ने कौन सा शंख बजाया?
3. सहदेव के शंख का नाम क्या था?
4. अनन्तविजय नामक शंख का क्या अर्थ है?
5. इस श्लोक में किसके शंखनाद से सत्य और धर्म की जीत का संकेत मिलता है?
6. इस श्लोक में शंखनाद का क्या महत्व बताया गया है?
7. युधिष्ठिर के शंख बजाने का क्या विशेष अर्थ था?
8. यह श्लोक हमें कौन सा महत्वपूर्ण जीवन संदेश देता है?
9. इस श्लोक में किस पांडव का नाम नहीं लिया गया है?
10. 'सुघोष' और 'मणिपुष्पक' किसके शंखों के नाम हैं?

